Ziyarat E Nahiya In Hindi 〈Windows PREMIUM〉

यह माना जाता है कि यह इमाम मेहदी का इमाम हुसैन के लिए शोक है, जिसमें वे कहते हैं, "अगर मैं मौजूद होता, तो मैं अपनी जान की बाजी लगा देता।"

अहलेबैत (अ.स.) के दुखों पर आंसू बहाना और उनकी ज़ियारत पढ़ना गुनाहों के कफ़ारे का जरिया बनता है।

यह ज़ियारत साल के किसी भी दिन और किसी भी समय पढ़ी जा सकती है, लेकिन परंपरा के अनुसार:

यह लेख शिया इस्लामी मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक जानकारी प्रदान करना है। ziyarat e nahiya in hindi

अल्लामा मजलिसी ने इस ज़ीयारत की प्रामाणिकता की पुष्टि की है।

आइम्मा (अ.स.) ने इस ज़ियारत की बहुत तारीफ़ बयान की है:

. It mentions the thirst of the children, the bravery of the companions, and the specific details of Imam Hussain's martyrdom. Universal Mourning जिसमें वे कहते हैं

इमाम महदी (अ.स.) इसमें अपने दादा के जिस्म पर लगे तीरों और तलवारों के घावों का ज़िक्र करते हैं।

"अस्सलामू अला आदमा सफ़वतिल्लाह मिन ख़लकिह, अस्सलामू अला नूहिन मुजीबति दा'वतिह, अस्सलामू अला इब्राहीम ख़लीलिल्लाह..."

यह इस ज़ियारत का सबसे मार्मिक हिस्सा है। इमाम मेहदी (अ.स.) शब्दों के माध्यम से उस दिन घटी हर पीड़ादायक घटना को जीवंत कर देते हैं। उन्होंने यह वर्णन इस प्रकार किया है मानो वह स्वयं उस समय घटित हो रही हों। इसमें इमाम हुसैन (अ.स.) की प्यास, उनके साथियों की बहादुरी, उनके परिवार (अहल-ए-बैत) पर हुए अत्याचारों, और अंत में कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (अ.स.) के सिर का तन से जुदा होने तक की घटनाओं को बड़े ही विस्तार और गमगीन अंदाज में बयान किया गया है। इस ज़ियारत की एक अनूठी विशेषता यह है कि यह कर्बला के उन शहीदों का नाम लेकर उल्लेख करती है जो अन्य ज़ियारतों में नहीं मिलते। "अगर मैं मौजूद होता

"Assalamu alaika ya Aba Abdillah, Assalamu alaika yabna Rasoolillah..."

زیارت ناحیہ (Ziyarat e Nahiya) امام حسین علیہ السلام اور کربلا کے دیگر شہداء پر پڑھی جانے والی ایک انتہائی اہم اور دل ہلا دینے والی زیارت ہے۔ یہ زیارت خود امامِ زمانہ عجل اللہ تعالی فرجہ الشریف (امام مہدیؑ) سے منسوب ہے، جس میں انہوں نے واقعہ کربلا کے مصائب، امام حسینؑ کی مظلومیت اور ان کے اصحاب کی قربانیوں کو نہایت ہی دردناک الفاظ میں بیان کیا ہے۔

इमाम-ए-ज़माना ने इस ज़ीयारत के माध्यम से अपने दादा इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रति अपनी गहरी संवेदना और दुःख को प्रकट किया है।

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